Sunday, March 10, 2019

''Samaj me dahej pratha ki badhti samasya''

               ''समाज में दहेज़ प्रथा की बढ़ती समस्या'' 

दहेज़ प्रथा एक सामाजिक समस्या है। दहेज़ प्रथा गैर-कानूनी होने के बावजूद भी ये हमारे समाज में खुली तौर पर राज करती है। हमारे समाज में किसी लड़की की शादी के समय लड़की के परिवार वालों के द्वारा लड़के या उसके परिवार वालों को नगद या किसी भी प्रकार की कीमती चीज़ बिना मूल्य में देने को दहेज़ कहा जाता है। जिसका अर्थ लड़के के परिवार वालों द्वारा लड़के का मूल्य भी समझा जाता है। ऐसी सोच हमारे देश के भविष्य पर बड़ी रुकवाई बनकर बैठी है। दहेज़ की सोच हमारे देश की सभी उन्नति और आधुनिक तकनिकी की गाल पर एक तमाचा है। दहेज़ प्रथा हमारे देश में गरीब के परिवार से लेकर काफी बड़ी हस्तियों के घर का अनचाहा रीति बन गया है। दहेज़ प्रथा लालच का नया रूप है जो कि एक दुल्हन की ज़िन्दगी की वैवाहिक, सामाजिक, निजी, शारीरिक और मानसिक क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव डालता है, जो कि कभी-कभी बड़े दर्दनाक परिणाम लाता हैं। दहेज़ प्रथा को निभाने वालों से ज़्यादा दोषी इस प्रथा को आगे बढ़ते हुए देख समाज में कोई ठोस कदम नहीं उठाने वाले हैं। यह प्रथा सदियों से चलती आ रही है जो कि बदलते वक़्त के साथ और भी गहरी होती चली जा रही है। यह प्रथा केवल अमीरो तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये अब मध्य वर्गियों और गरीबों का भी सरदर्द बन गया है। दहेज़ प्रथा को बढ़ावा देने में समाज की ही अहम भूमिका है। वह समाज ही है जो कि दहेज़ प्रथा की जड़ को  मज़बूत कर रहा है। दहेज़ प्रथा का सबसे बड़ा कारण पुरुष प्रधान समाज हैं। दहेज़ प्रथा के कारण लड़कियों के साथ बहुत अन्याय होता है और अगर वह दहेज़ लाने के खिलाफ बोलती है तो उस पर अनेको अत्याचार भी किये जाते हैं। कहीं कहीं तो दहेज़ साथ न लाने की वजह से लड़कियों को जला भी दिया जाता है। इसी दहेज़ प्रथा के डर से कई माँ-बाप को उनकी बेटियाँ किसी बोझ से कम नहीं लगती। इसलिए हम सब को दहेज़ प्रथा के खिलाफ एक जूट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी। दहेज़ प्रथा को रोकने के लिए हमें कभी भी ऐसे घर में शादी करने के लिए अपनी स्वीकृति नहीं देनी होगी जहाँ पर दहेज़ की माँग हो रही हो। हमें महिला सशक्तिकरण पर ज़ोर देना होगा और इसकी चाबी एजुकेशन है। हमें सामाजिक जागरूकता फैलानी होगी और दहेज़ प्रथा के खिलाफ बने कानून को भी सख्ती से इस्तेमाल करना होगा। अब दहेज़ प्रथा को 'हाँ' से 'न' में बदलना का वक़्त आ गया हैं।            

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